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Tuesday, July 28, 2020

बेवजह-बेचैनी (restlessness - without reason)

zoshh
restlessness-without-reason
restlessness-without-reason

बेवजह-बेचैनी (restlessness - without reason)
(hindi poetry)
कितना कहने को है 
कोई सुनता हो 
तब तो..

क्यों भागे जाते हो 
थोड़ा सांस
तो ले लो ....

एक दिन ऐसा ही
होने वाला है
तुम तो होंगे
पर सांस नहीं होगी
फिर क्यों अफरा-तफरी 
मचाते हो 

जीवन की बाती का तेल 
चुका जाता है 
तुम क्यों 
रोना-रोते रहते हो 

होने दो 
जो भी होना है 
जिसका है, वो जाने 
तुम क्यों 
अपनी तंग अड़ाते हो 

तुम सुब जगह 
अपनी चलाते हो .....

तुराज 


Friday, July 10, 2020

मौत का डर : fear of death

zoshh
hindi poetry on death
मौत का डर : fear of death

"मौत का डर (fear of death) 
(hindi poetry)

कब किसने सोचा था,
की थम सी जाएगी दुनिया 
अपनों से अब तक बचा सा रहता था, मैँ
वक्त के बहाने 
आज अपनों से ही डर गया हूँ, कितना 

खाक में मिलते हुए मंझर का खौफ़ है इतना 
की 
घर में दुबक के, वक्त के हाथों
मंजूर है पीटना 

घर से झाँकने में भी डर है, 
इतना की 
हर साँस मैं आती हवा, मौत की याद दिलाती 
है कितना 
कभी वक्त को कोसता था इतना "तुराज" 
आज वक्त के हाथों मजबूर है, कितना 

किस को सुनाऊँ दास्ताँ-ऐ- पल पल की अपनी 
इस घर के अंदर 
हर कोई मेरा अपना बनकर, कुतर सा रहा है 
मुझे कितना 

आखों में इतना खौफ़ लिए दिखते हैं लोग कि
रूह कहती है, मत निकल 
कहीं मौत का देवता, तुझे बना न लें अपना 

तुराज