Friday, September 11, 2020

लकड़ी का कीड़ा (Wooden worm) Hindi Poetry

zoshh
लकड़ी का कीड़ा (Wooden worm) Hindi Poetry :- " सोया-सोया सा, खोया-खोया सा मदमस्त चला जा रहा था मैं, मंजिल की तरफ शुक्र उस राह के काँटे का, जिसने मुझे चलना सिखा दिया "

लकड़ी का कीड़ा (Wooden worm)(Hindi Poetry)
मेरे अचेतन 
सोये मन पर
कोई आहट सी
करता है वर्षों से
मेरे बिस्तर के नीचे
उसकी कर्कश ध्वनि 
मानो कहती है
उठ ! जाग, सो मत

मैं जीवन के भोगों में मदमस्त
अपने से उलझता, उलझाता
फिर उसको सुलझाता
बुनते-बुनते फिर अपने ही 
मकड़-जाल में बंद

अब मेरा ही
 ये बूढ़ा तन
चुभता है मुझको
तब भी करवट बदल-बदल
सुनता हूँ, कहता उसको
उठ! जाग, मत सो

मैंने पूछ ही लिया 
चुपके से उससे कानों में
बोला-"तूराज़" मैं भी तुझ सा
मानव ही था पहले

भोगों ने मुझसे, भुलाया है मुझको
मैंने भी परिवार बनाये
सोहरत और नाम कमाए
पर अपने को खो कर

आज लकड़ी का
 कीड़ा बन पछताता हूँ
न सोता हूँ रातों को
वरन  मानव को समझाता
और जगाता भी हूँ

उठ ! जाग, मत सो
मत खो अपने को
क्या तू भी है, मुझसा
लकड़ी का कीड़ा बनने को


तूराज़......







Sunday, September 6, 2020

पैगामे पत्ता (Letter by Life) (Hindi Poetry)

zoshh
(Hindi Poetry on life)
पैगामे पत्ता (Letter by Life) (Hindi Poetry)
:- 
"हवा में पत्ते की तरह बह जायेगी जिंदगी कब किसी झाड़ू ने रहम किया है "तूराज़" ढेर लगा कर, फूंक दी जायेगी जिंदगी"

लकड़ी का कीड़ा (Wooden worm) (Hindi Poetry)
पैगामे पत्ता (letter by life)
(hindi on life poetry)
पैगामे पत्ता (Letter by Life) 
मेरे इस हालत पर 
विचार न कर
अपने हालात पर थोड़ा 
ख़याल तो कर
जाग ! वक़्त की पुकार को सुन
ऊपर उठा ख़याल को

लड़ आँधियों से 
बचा वज़ूद अपना
टहनी टूट भी जाये हर्ज़ नहीं
कर फिक्र इतनी कि
जड़ टूटे नहीं
एक वक्त आएगा ही 

तू मान या न मान
मैं गिरा हूँ
सूख कर जिस तरह 
आज दम नहीं 
इतना भी 
कि सह सकूँ 
हौले से झोंके 
मैं दर-बदर ठोकर सा खाता

मान ! ए तूराज़ 
तू पकड़कर रख 
ये  फरमान
जब तू भी गिर जाएगा 
धरती पर मेरी तरह
पर तेरी आँख उठी होगी 
आसमान पर

न होगा होश 
तुझे जमीं का
मेरी तरह इस 
जिल्लत भरी
झाड़ू की ठोकर का
न  इच्छाओं की चीटियाँ काटेंगी
तुझे कब्र में
गिर कर भी तू चूमेगा आसमान


तूराज़......

             


    
                 

Sunday, August 30, 2020

रहस्यमय रचना ( mysterious creation)

Deepak joshi (tooraaz)
रहस्यमय रचना ( mysterious creation) (hindi poetry) :-
" एक बाज़ार सा लगा दिखता है हर कोई कुछ दे जाता है, कुछ ले जाता है रहस्य तो ये है, घर तक आते-आते थैला खाली हो जाता है, सब कहां जाता है ? "

रहस्यमय रचना ( mysterious creation) (hindi poetry)
hindi poetry

रहस्यमय रचना ( mysterious creation)
जो कुछ भी होता है यहां
उसका क्या मकसद
होता है....?

दिन, बार, व्रत, त्योहार
पूनम, अमावस,
कीट-पतंग, नभचर, थलचर,
मानव, किन्नर, गुरु-ज्ञानी, देव-महादेव
के अविरल आने-जाने का
क्या मकसद होता है ?

हवा, पानी, सूरज, चांद, नदी-नाले
जीव-जंतु ,पेड़-पौंधे, 
चलते ही जाते हैं।
इस आने जाने का
क्या मकसद होता है ?

देश-दुनिया, धर्म, समाज-सभ्यता
जाति-वर्ण,काला-गोरा सब वहीं है
अनंत युगों से, फिर
इनके खातिर लाखों लोगों के मरने का
क्या मकसद होता है?

हर जीव अपनी-अपनी दौड़ में है-
चींटी हो, मधुमक्खी या मानव
सब इकट्ठा करते ही जाते,
घर बनाते, प्रजनन करते,
अपनों और अपनी 
चिंता में मर जाते, 
कहां चले जाते हैं ? 
फिर इस सब  आने-जाने का
क्या मकसद होता है?

गुरु-ज्ञानी, पीर-पैगम्बर, ऋषि-मुनि
ज्ञान बखारे , आते-जाते रहते हैं
खबर आती है रोज़ 
या आएगी ही  
अपना गया कोई, अपना-अपना करके
"तूराज़"  नाम भी 
निश्चित ही है इस कतार में
फिर इस मैं-और-मेरी का क्या 
मकसद होता है ??????


तूराज़......